28 May 2024

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कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर आई बड़ी खबर, आपके मन में भी हैं वैक्सीन को लेकर चिंता, तो जाने क्या हैं डॉक्टर की राय

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कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर आई बड़ी खबर, आपके मन में भी हैं वैक्सीन को लेकर चिंता, तो जाने क्या हैं डॉक्टर की राय  नमस्कार दोस्तों आज के हमारे इस आर्टिकल में आपका स्वागत हैं, दोस्तों ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने हर किसी को चिंता में डाल दिया है। ब्रिटिश अदालत में एस्ट्राजेनेका कंपनी ने माना है कि उसकी वैक्सीन लगवाने से दुर्लभ मामलों में टीकाकरण के बाद खून के थक्के जमने और कम प्लेटलेट काउंट देखने को मिल सकता है।

एस्ट्राजेनेका ने लंदन के हाईकोर्ट में बताया कि थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक सिंड्रोम (टीटीएस) सिर्फ कुछ मामलों में होने की संभावना है। एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने मिलकर इसे डेवलप किया है। पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ने इसे बनाया है। भारत में इसे कोविशील्ड के नाम से जाना जाता है और लगभग 175 करोड़ खुराक लगाई गई।

भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से ही कोविशील्ड वैक्सीन को मैन्युफैक्चर किया था। ब्रिटेन की मीडिया के अनुसार, कंपनी के खिलाफ 51 मुकदमे चल रहे हैं। दर्जनों मामले ऐसे हैं जिनमें यह आरोप लगाया है कि टीके के कारण जानें गई हैं और कई लोग गंभीर रूप से बीमार पड़े हैं।

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क्या कहते हैं भारत के डॉक्टर

इंडिया टुडे ने उन डॉक्टरों से बात की जिन्होंने महामारी का बारीकी से अध्ययन किया गया है। आइए जानते हैं कि इस मुद्दे पर डॉक्टरों का क्या कहना है। एस्ट्राजेनेका कंपनी ने कोर्ट में माना है कि कोविड वैक्सीन लेने वाले व्यक्तियों में दुर्लभ दुष्प्रभाव देखे गए हैं, इस बारे में आप क्या कहेंगे?

हैदराबाद के अपोलो हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट में स्वीकार किया है कि कोविशील्ड और वैक्सजेवरिया ब्रांड नामों के तहत बेची जाने वाली उनकी वैक्सीन के टीटीएस (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम विद थ्रोम्बोसिस) नामक साइड इफेक्ट्स होने की संभावना बहुत ही कम है. पहले भी एक्वायर्ड टीटीएस कोविड के टीकों समेत कई अन्य टीकों के प्रतिकूल प्रभाव से जुड़ा रहा है।

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क्या है टीटीएस बीमारी

दोस्तों आपको बता दें कि TTS एक दुर्लभ कंडीशन है जिसमें शरीर में खून के थक्के बनने लगते हैं और खून में प्लेटलेट्स की संख्या कम होती जाती है।

नेशनल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सह अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा, ‘यह सब ब्रिटेन की मीडिया ने रिपोर्ट किया है जो ब्रिटेन में अदालती कार्यवाही के दौरान हुआ। वैक्सीन से होने वाले दुर्लभ दुष्प्रभाव TTS पर पहले ही चर्चा हो चुकी है। वास्तव में WHO ने मई 2021 में इस पर एक रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी.’

भारत में जिन लोगों ने लगभग 2 साल पहले वैक्सीन ली थी, वे आज बहुत चिंतित हैं, क्या उन्हें चिंतित होना चाहिए?

डॉ. सुधीर कुमार ने वैक्सीन से संबंधित प्रतिकूल प्रभाव पर कहा कि आमतौर पर वैक्सीन लगने के बाद कुछ हफ्तों (1-6 सप्ताह) के भीतर साइड इफेक्ट होते हैं। इसलिए भारत में जिन लोगों ने 2 साल पहले वैक्सीन ली थी, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है।

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नेशनल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन में सह अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा कि यह साइड इफेक्ट्स पहली खुराक के बाद पहले महीने में ही होते हैं, उसके बाद नहीं।

Disclaimer : दोस्तों आज के हमारे इस आर्टिकल में आपका स्वागत हैं, दोस्तों अगर इस आर्टिकल में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती हैं तो इसमें abharatlive.com की कोई जवाबदारी नहीं रहेगी।

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